न्यू दिल्ली : देश में डिजिटल कनेक्टिविटी लगातार बेहतर होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों मोबाइल यूजर्स आज भी नेटवर्क की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं। साइबर मीडिया रिसर्च यानी CMR की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि हाईवे पर यात्रा करने वाले 79 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप या नेटवर्क बाधा जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह समस्या सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं है बल्कि लोगों के कामकाज और पेशेवर जीवन पर भी सीधा असर डाल रही है। करीब 64 प्रतिशत बिजनेस यूजर्स ने बताया कि कॉल ड्रॉप की वजह से उन्हें महत्वपूर्ण क्लाइंट डील्स गंवानी पड़ीं। वहीं हर तीन में से दो यूजर्स का कहना है कि खराब नेटवर्क के कारण वे संभावित ग्राहकों को खो चुके हैं। 71 प्रतिशत लोगों को बार-बार ग्राहकों को दोबारा कॉल करना पड़ा, जिससे उनकी प्रोफेशनल इमेज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
नेटवर्क की समस्या का असर मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिला है। रिपोर्ट में 83 प्रतिशत यूजर्स ने माना कि जरूरी कॉल के बीच में कट जाने से उन्हें बेचैनी और लाचारी महसूस होती है। लगातार नेटवर्क टूटने की वजह से तनाव और असुरक्षा की भावना भी बढ़ रही है। खासतौर पर हाईवे, मेट्रो और कमजोर सिग्नल वाले इनडोर क्षेत्रों में स्थिर कनेक्टिविटी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हालांकि रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट तकनीक वाले स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले 81 प्रतिशत यूजर्स ने बेहतर नेटवर्क अनुभव की बात कही। 74 प्रतिशत लोगों ने कॉलिंग को पहले से अधिक भरोसेमंद बताया, जबकि 72 प्रतिशत यूजर्स ने कहा कि कमजोर नेटवर्क वाले इलाके से निकलते ही उनके फोन ने तेजी से सिग्नल रिकवर कर लिया।
CMR के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम के अनुसार, भारत ने मोबाइल नेटवर्क कवरेज बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन हाईवे और लो-सिग्नल क्षेत्रों में लगातार मजबूत कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
